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BALI, SUGREEV AUR DALIT

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इस किताब में मैंने दो लघु-उपन्यास समाहित किये हैं। पहली कहानी ‘बाली और सुग्रीव’, जिसका मुख्य पात्रा बाली नाम का इंसान हैं, जो कि बहुत ही धार्मिक और भ्रष्ट हैं,

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इस किताब में मैंने दो लघु-उपन्यास समाहित किये हैं। पहली कहानी ‘बाली और सुग्रीव’, जिसका मुख्य पात्रा बाली नाम का इंसान हैं, जो कि बहुत ही धार्मिक और भ्रष्ट हैं, जैसा की अमूमन होता ही हैं। और जैसे कि उम्मीद की जा सकती हैं, साथ में बहुत बेवकूफ भी हैं। धर्म और भ्रष्टाचार की इस जिंदगी में उसका छोटा भाई सुग्रीव उसका साथ देता हैं, लेकिन तभी तक, जब तक कि वो उसके लिए फायदेमंद होता हैं। बाली अपने और अपने भाई द्वारा किये हर भेदभाव, भ्रष्टाचार और बेवकूफाना आचरण को धर्म के नाम पर सही ठहराता जाता हैं। ये स्वार्थ का रिश्ता और बेवकूफी भरे कर्म कितने दिन चलते हैं और उनका अंत क्या होता हैं, ये तो आपको कहानी पढ़कर ही मालूम होगा, लेकिन अंत में बाली अपनी हरकतों से हंसी का पात्रा जरूर बन जाता हैं। दूसरी कहानी ‘दलित की भयंकर शक्ति’ एक ऐसे इंसान के बारे में हैं जो पुत्रा मोह में किसी ढोंगी बाबा के चक्कर में फंस जाता हैं। और पुत्रा प्राप्ति के लिए अवैज्ञानिक तरीके अपनाकर गर्भ में पल रहे बच्चे को नुकसान पहुँचा देता हैं। नतीजा यह होता हैं कि उसका बच्चा दिमागी रूप से पूर्णतः विकसित नहीं हो पाता हैं। और जब ऐसे बच्चों को समाज के विशेष सहयोग की जरुरत होती हैं, देखभाल की जरुरत होती हैं, तब समाज उसके बिलकुल विपरीत जाकर उन पर अत्याचारों की बारिश कर देता हैं। यह कहानी ऐसे ही एक बच्चे की हैं जो इस समाज की यातनाएं सहता सहता एक दिन खुद भयंकर शक्ति का मालिक बन जाता हैं। फिर समाज अपने आप को बचाने के लिए इधर उधर भागता हैं, पर क्या उस दलित की भयंकर शक्ति से अपने आप को बचा पाता हैं,

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