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DALIT JIVAN KI KAHANIYAN

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विकास के प्रारंभिक चरण में जब अधिक मानव- श्रम की आवश्यकता अनुभव हुई तो आदमी ने आदमी का शोषण करना शुरू कर दिया, और इसके साथ ही आदिम समाज के

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विकास के प्रारंभिक चरण में जब अधिक मानव- श्रम की आवश्यकता अनुभव हुई तो आदमी ने आदमी का शोषण करना शुरू कर दिया, और इसके साथ ही आदिम समाज के कृषियुग में दासप्रथा का जन्म हुआ । शोषित और दलित वर्ग की जो समस्याएँ स्वतंत्रता से पूर्व सामाजिक स्तर पर थीं, उसके बाद उन्होंने आर्थिक-राजनीतिक भयावह शक्ल अख्तियार कर ली । इन विषम समस्याओं से अवगत होने और उनका समाधान खोजने के लिए हमने सुधारवादी, प्रगतिशील और क्रांतिकारी होने का ढोंग रचा । किंतु अपनी सुख-सुविधा और उच्च वर्गीय पहचान को कायम रखने के लिए निर्बलों और दलितों का शोषण करने से हम बाज न आ सके, न हमने अपनी इस घिनौनी हवस से कभी गुरेज ही किया । हमारी कुलीनता और रईसाना आदतों का शिकार आजादी से पहले भी दलित वर्ग था और आजादी के प्रायः चालीस वर्ष बाद भी हमारा शिकार यही वर्ग है-नितात निरीह और बेचारा ।
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Dalit Jivan Ki Kahaniyan Books by Giriraj Sharan
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